विश्व हिंदी दिवस
हिंदी मन के हर भाव की भाषा है
हिंदी हमारे प्यारे राष्ट्र की भाषा है।
स्नेह से भरी हुई हमारी संस्कृति,
हिंदी हमारे संस्कार की भाषा है।
बढ़ा मीठा बोलती है हिन्दी,
दिल के अंदर रहती है हिन्दी।
रिश्तों को जोड़ती हैं हिंदी,
मधुर गुंजन शब्दों में बहती है हिंदी।
वेद पुराण, रामायण लिखती हैं हिंदी
महाभारत की कथा कहती हैं हिंदी।
प्रेम भाव भावनाओं को छूती हैं हिंदी
अपने बड़ों का आदर करती हैं हिंदी।
देश के जज़्बात ज़िन्दगी में लाती है
जवानों में जोश जुनून भरती हैं हिंदी।
एकता से रहना सिखाती है हिंदी
धर्म आस्था से बात करती हैं हिंदी।
ईश्वर की प्रार्थना अभिनंदन हैं हिंदी
विद्यालय की स्नेह भरी वंदना है हिंदी।
अच्छे स्वभाव की भाषा है हिंदी
बच्चों के सजते हुए ख्वाब है हिंदी।
माता पिता के परवरिश की शिक्षा है हिंदी
अतुल्य अनमोल सत्य वचन प्रवाह है हिंदी।

लेखिका श्रीमती क्रांति देवी आर्य
ग्वालियर, मध्यप्रदेश
स्वरचित रचना

