गुलाब की पंखुड़ियों ओस की बूंदें,जैसे तेरी अनुभूति,तेरे कहे हर स्वर में बसती है: आकांक्षा भदौरिया

“शब्द तेरे, स्पर्श हवा का, और

स्मृतियाँ मन की धरती पर अंकित हैं,

गुलाब की पंखुड़ियों ओस की बूंदें जैसे

तेरी अनुभूति,तेरे कहे हर स्वर में बसती है,

और मैं उसे हृदय की वीणा पर सहेज लेती हूँ।”

 

गुलाब दिवस की शुभकामनाएँ! 🌹✨

आकांक्षा भदौरिया